प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पुण्य तिथि दिवस 18 जनवरी प्रतिवर्ष विश्व शांति दिवस के रूप में पूरे विश्व के ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेवा केन्द्रों पर अत्यंत श्रद्धा, भावनात्मक एकता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया जाता है। वर्ष जनवरी 2026 में यह उनका 57वाँ स्मृति दिवस है। यह दिवस केवल एक महान आत्मा की स्मृति का अवसर ही नहीं, बल्कि विश्व में शांति, पवित्रता और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का पावन पर्व है।प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का मूल नाम लेखराज कृपलानी था। वे सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) के हैदराबाद नगर के एक प्रतिष्ठित हीरा व्यापारी थे। सांसारिक वैभव, प्रतिष्ठा और समृद्धि होने के बावजूद उन्होंने ईश्वरीय प्रेरणा से अपना संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण हेतु समर्पित कर दिया। उन्होंने स्वयं को ईश्वर का साधन बनाकर राजयोग द्वारा आत्मिक जागृति और विश्व परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।
ब्रह्मा बाबा ने सिखाया कि मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसकी आत्मा है और जब आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेती है, तभी सच्ची शांति का अनुभव होता है। उनके द्वारा स्थापित राजयोग ध्यान आज विश्वभर में लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा दे रहा है। उन्होंने जाति, धर्म, भाषा और राष्ट्र की सीमाओं से ऊपर उठकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार किया।
18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा ने अपना स्थूल शरीर त्याग कर अव्यक्त रूप में प्रवेश किया। यह दिवस ब्रह्माकुमारी परिवार के लिए शोक का नहीं, बल्कि विश्व सेवा के संकल्प को नवीनीकरण करने का दिन है। इसी कारण इसे विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी सेवा केन्द्रों पर विशेष राजयोग ध्यान, शांति मार्च, मौन साधना, दीप प्रज्वलन, विश्व शांति के लिए सामूहिक संकल्प, प्रदर्शनी, प्रवचन और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ब्रह्मा बाबा का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और स्नेह का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने महिलाओं को आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान कर समाज में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया। आज ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व के 140 से अधिक देशों में आध्यात्मिक सेवाओं के माध्यम से मानसिक शांति, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दे रही है, जो ब्रह्मा बाबा की दूरदर्शिता का सजीव प्रमाण है।
57वें स्मृति दिवस के अवसर पर यह संकल्प लिया जाता है कि हम सभी अपने जीवन में शांति, पवित्रता, प्रेम और सह-अस्तित्व को अपनाकर विश्व में फैली अशांति, तनाव और हिंसा को समाप्त करने में अपना योगदान देंगे। ब्रह्मा बाबा की यही सच्ची श्रद्धांजलि है कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर स्वयं को बदले और विश्व परिवर्तन के निमित्त बनें।
निस्संदेह, प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पुण्य स्मृति युगों-युगों तक मानवता को शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति की प्रेरणा देती रहेगी।
बी के रमेश
अजमेर (ब्रह्माकुमारीज )