पूर्व प्रधानमंत्री, जनता पार्टी के संस्थापक कर्णधार एवं जन-जन के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज सौवीं जयंती पर उन्हें सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि ।
आदरणीय वाजपेयी जी बहुत ही धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे । वर्ष 1977 के लगभग पुष्कर आने पर सरोवर के मुख्य गऊघाट पर पूजा करने के पश्चात उन्होंने सरोवर के पवित्र जल में ग्यारह डुबकी लगाई ।
पुरोहित नन्द गुरु ने वैदिक मंत्रोच्चार से उन्हें पूजा कराई। वाजपेयी जी के सरोवर के पानी में उतरकर डुबकी लगाने की कहने पर नन्द गुरू ने उन्हें पेड़ी पर ही बैठकर लौटे से स्नान करने की सलाह दी पर उन्होंने साफ़ मना कर दिया । पुरोहित जी ने उनका हाथ पकड़ कर स्नान कराने की इच्छा प्रकट की जिसे भी उन्होंने नकार दिया और स्वयं ने सरोवर की तीन- चार सीढ़ियाँ (पेड़ी) उतर कर स्नान किया । सभी ने उन्हें फिसलन (काई) का ध्यान रखने को कहा।
श्री वाजपेयी जी पहले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने मात्र सफेद चड्ढी पहन कर नंगे शरीर विधि विधान से सरोवर की पूजा की । यहाँ तक कि उन्होंने पवित्र सरोवर की पेड़ी पर किसी भी प्रकार के आसन पर बैठने को भी मना कर दिया ।
मैं उस समय अजमेर से प्रकाशित न्याय दैनिक में सिटी रिपोर्टर तथा दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान दैनिक का संवाददाता था । पुष्कर के ट्यूरिस्ट बंगले में मेरी उनसे संक्षिप्त बातचीत हुई जो इन समाचार पत्रों में साक्षात्कार के रूप में प्रकाशित हुई ।
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने आज राज्य की साढ़े ग्यारह हज़ार ग्राम पंचायतों में अटल सेवा केन्द्र खोलने तथा अटल प्रेरक लगाने की घोषणा कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि प्रकट की है ।
ऐसी महान विभूति को उनकी सौवीं जयंती पर पुन: नमन।
प्यारे मोहन त्रिपाठी
वरिष्ठ पत्रकार एवं
संयुक्त निदेशक, सूचना एवं
जनसम्पर्क (रि) अजमेर