नई दिल्ली । रुबरू थियेटर ग्रुप ने दिल्ली के प्रतिष्ठित एलटीजी सभागार, मंडी हाउस में संगीतमय नाटक “हीर राँझा” का मंचन किया। यह नाटक प्रसिद्ध पंजाबी लोककाव्य “हीर राँझा” पर आधारित था, जो मोहब्बत की अमर और अनूठी दास्तान को जीवंत करता है। इसको जानी मानी नाटककार, निर्देशक और अभिनेत्री काजल सूरी ने लिखा और निर्देशित किया है ।
नाटक में हीरराँझा की प्रेम कहानी को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया, जहां संगीत और अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रुबरू थियेटर ग्रुप ने इसे जीवंत और दिलचस्प बनाने के लिए अपने विशेष प्रयासों से इस काव्य को समकालीन मंच पर प्रस्तुत किया, जिससे हर आयु वर्ग के दर्शक जुड़ सके। यह नाटक पंजाब की संस्कृति और तहजीब को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। हीर राँझा, जिन्होंने एक-दूसरे से गहरी मुहब्बत की और उनका यह प्यार हमेशा के लिए अमर हो गया। हीर और राँझा के पंजाब के प्रसिद्ध गाँवों से आते हैं, हीर झंग स्याल की थी और राँझा तख़्त हजारे का।हीर राँझा, जिन्होने मुहब्बत की और क़िस्सा लाफानी हो गया।
यह पंजाब की पूरी तहजीब की कहानी है। हीर एक ही धुन में गाई जाती है और इसी धुन में पंजाब की सरजमीं पहचानी जाती है।
“हीर राँझा” का मंचन न केवल कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह भारतीय लोककला और संस्कृति की धरोहर को भी सजीव रूप से प्रस्तुत करता है। नाटक में संगीत, नृत्य और संवादों का बेहतरीन मेल दर्शकों को मोहित कर गया।
रूबरू थियेटर ग्रुप ने इस प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रेम, बलिदान और समर्पण की भावना को एक अद्भुत रूप में पेश किया। मंच पर जस किरण चोपड़ा, शुभम शर्मा, कृष बब्बर, तनीषा गांधी, गीता सेठी, आशा खन्ना, वर्षा, अपूर्व गुप्ता, स्पर्श रॉय, प्रवीण, राशि, सुशांत, संदीप, वैभव पॉल, सुजाता जैन, साहिल, तरुण मग्गो ने अपने अभिनय से दर्शकों को मोह लिया। बैंक स्टेज में नीरज तिवारी और हर्षित सिंघल, मेक अप रशीद दा, संगीत संचालन जेरी, प्रकाश संचालन सुनील चौहान, प्रोडक्शन कॉर्डिनेटर रोहित कुमार और मंच संचालन जानी मानी पॉडकास्टर सुखनंदन बिंद्रा ने किया ।
इस अवसर पर कई जानी मानी हस्तियां भी सभागार में मौजूद रही।
मंचन के दौरान दर्शकों ने न केवल संगीत की सराहना की, बल्कि कलाकारों की उत्कृष्ट अभिनय और भावनात्मक अभिव्यक्ति की भी तारीफ की। इस नाटक की प्रस्तुति ने दर्शकों को पंजाब की सांस्कृतिक धारा में डुबो दिया। संगीत, नृत्य और अभिनय के माध्यम से इस अमर और अनूठी मोहब्बत की दास्तान को मंच पर जीवित किया गया।
रूबरू थियेटर ग्रुप के सभी सदस्य, निर्देशक और कलाकार इस सफलता का श्रेय दर्शकों को देते हैं जिन्होंने उन्हें अपार समर्थन और प्रेरणा दी। इस शानदार नाटक के बाद, दर्शक यह विश्वास करने लगे हैं कि भारतीय लोककाव्य और संगीत थिएटर के माध्यम से सदियों पुरानी कथाओं को नए तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।