ऑप्टिमस रक्षा क्षेत्र के लिए अपनी ड्रोन सेवाओं का पोर्टफोलियो मजबूत किया, नोएडा में एलएस स्पेक्ट्रम के उत्पादों की असेंबलिंग कर मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी
नई दिल्ली, 3 जनवरी, 2025- भारत में दूरसंचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के अग्रणी समूह ऑप्टिमस इंफ्राकॉम लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी ऑप्टिमस अनमैन्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (ओयूएस) ने भारतीय बाजार में एलएस स्पेक्ट्रम के अत्याधुनिक ड्रोन आधारित स्पेक्ट्रम एनालिसिस सॉल्यूशंस की मार्केटिंग, अंसेबली और वितरण करने के लिए जर्मनी स्थित एलएस टेलीकॉम एजी की अनुषंगी कंपनी एलएस स्पेक्ट्रम सॉल्यूशंस प्रा. लि. के साथ साझीदारी की आज घोषणा की। अपने ड्रोन व्यवसाय और मेक इन इंडिया को और गति देते हुए ऑप्टिमस की एलएस स्पेक्ट्रम के साथ साझीदारी, इसकी रक्षा पेशकश में पासा पलटने वाली साबित होगी और यह इस बाजार में कंपनी को और मजबूती प्रदान करेगी। इस साझीदारी से ड्रोन आधारित सॉल्यूशंस से परे जाने की संभावना है और कंपनी स्पेक्ट्रम सर्विलांस, दिशा खोजने और जियोलोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट उपाय, सिग्नल इंटेलिंजेस, इलेक्ट्रॉनिक काउंटर उपायों जैसी विभिन्न क्षमताओं के जरिए स्पेक्ट्रम के प्रबंधन, अवलोकन के लिए इस बाजार में गहरी पैठ बनाएगी। इस रणनीतिक साझीदारी के जरिए शुरुआत में ऑप्टिमस एलएस स्पेक्ट्रम के लिए एडवांस्ड स्पेक्ट्रम एनालाइजर ड्रोन की बिक्री करेगी। ये उत्पाद रक्षा में विभिन्न क्षेत्रों में स्पेक्ट्रम निगरानी में बदलाव लाने की स्थिति में हैं। एलएस स्पेक्ट्रम भारतीय बाजार को मूल्य प्रदान करने के लिए स्पेक्ट्रम विश्लेषण टेक्नोलॉजी में अपनी गहरी विशेषज्ञता लाएगी और मेक इन इंडिया का उद्देश्य पूरा करेगी। ये ड्रोन निर्बाध रूप से पता लगाने और स्पेक्ट्रम उपयोग का विश्लेषण करने में सपोर्ट करेंगे जिससे भारत में संचार फ्रिक्वेंसीज के प्रबंधन को सुधारा जा सकेगा।
यह साझीदारी भारतीय बाजार के लिए अत्याधुनिक दूरसंचार और ड्रोन आधारित सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने की दिशा में योगदान करने की दोनों कंपनियों की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करती है। अपनी स्थानीय विशेषज्ञता और ढांचागत सुविधाओं का उपयोग कर ओयूएस दूरसंचार, रक्षा, गृह सुरक्षा और नागर विमानन सहित विभिन्न क्षेत्रों को सेवाएं प्रदान करेगी और भारतीय संगठनों को किफायती, सटीक और अनूठे समाधान से सशक्त करेगी जो स्पेक्ट्रम विश्लेषण और निगरानी के लिए विशेष रूप से होंगे।
ऑप्टिमस इंफ्राकॉम के चेयरमैन श्री अशोक गुप्ता ने कहा, “हम हमारे उत्पादों का पोर्टफोलियो बढ़ाते हुए और ओयूएस द्वारा दी जा रही सेवाओं को लेकर उत्साहित हैं। हम इस गठबंधन को भारतीय रक्षा, गृह सुरक्षा और विमानन उद्योग के लिए गुणवत्तापूर्ण सॉल्यूशंस प्रदान करने की दिशा में हमारी वितरण एवं स्थानीयकरण क्षमताओं का उपयोग करने का एक आदर्श अवसर मानते हैं और इस वैश्विक साझीदारी से मेक इन इंडिया की कहानी आगे बढ़ेगी। इस साझीदारी से इस बाजार में बेजोड़ पेशकश की जा सकेगी और हम भविष्य में हमारी स्थिति मजबूत करने के लिए एलएस स्पेक्ट्रम के अन्य उत्पादों में विविधीकरण की भी संभावना तलाशेंगे।”
एलएस स्पेक्ट्रम सॉल्यूशंस के निदेशक श्री प्रसाद केरकर ने कहा, “यह सही मायने में हमारे लिए एक कीर्तिमान है क्योंकि इस एमओयू के जरिए हम इस देश में परिष्कृत और अपनी तरह के अनूठे ड्रोन आधारित स्पेक्ट्रम सॉल्यूशंस की पेशकश कर भारत के बढ़ते टेक्नोलॉजी परिदृश्य में योगदान करने की अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं। हमारा लक्ष्य पूरे भारत में इन अनूठे उत्पादों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इसे अपनाने पर जोर देना है और इसके लिए हम ऑप्टिमस के साथ मिलकर काम करेंगे। हम भारत में उपलब्ध अवसरों को लेकर उत्साहित हैं और हमारे अनूठे सॉल्यूशंस की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए स्थानीय भागीदारों के साथ हम सक्रिय रूप से काम करेंगे।”
केरकर ने कहा, “इस साझीदारी के जरिए हम भारत में जेलों से अवैध संचार जैसे अनाधिकृत सेलुलर गतिविधि के मुद्दे का समाधान करने के लिए भी सॉल्यूशंस विकसित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।”
इस यूएवी से संचार फ्रिक्वेंसीज़ की रीयल टाइम निगरानी सुगम होगी जोकि स्पेक्ट्रम संसाधनों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है खासकर दूरसंचार और नागर विमानन जैसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों में। इसके अलावा, वे सर्विलांस करने और अनाधिकृत स्पेक्ट्रम गतिविधियों का पता लगाने की सुविधा देकर रक्षा और गृह सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे। स्पेक्ट्रम विश्लेषण के लिए ड्रोन तैनात कर संगठन बदलते वातावरण में दक्षता के साथ परिचालन कर सकते हैं और पारंपरिक स्पेक्ट्रम निगरानी पद्धतियों के मुकाबले समय और खर्च की काफी बचत कर सकते हैं। हाल ही में जारी ईवाई-फिक्की की रिपोर्ट- मेकिंग इंडिया दि ड्रोन हब ऑफ दि वर्ल्ड के मुताबिक, ड्रोन और इसके कंपोनेंट का उद्योग भारत की विनिर्माण की संभावना वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 23 अरब डॉलर पर पहुंचा सकता है।