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मसीही समाज का प्रकाश पर्व दीपावली के समकक्ष पर्व क्रिसमस

गेस्ट राइटर
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December 23, 2024
मसीह  समास   यीशु मसीह को परमात्मा का   धरती पर भेजा हुआ पुत्र मानते हैं |  वहीं सनातन धर्मी  अपने 16 अवतारों  को  साक्षात परमात्मा मानते है राम  कृष्ण भगवान विष्णु के मनुष्य रूप मे ही अवतरित हुए थे  किन्तु उन सभी का संदेश समान है  |
एक्समस  पर अमेरिका और पश्चिमी देशों   के अंदर बहुत सर्दी होती है  बर्फबारी होती है किन्तु लोगो का उत्साह कम नहीं होता है | बड़े बड़े स्टोर माल  में सेल डिस्काउंट  सभी लोग   खरीददारी अपने परिवार और ईष्ट मित्रो के लिए गिफ्ट उपहार खरीदते है इस तरह मिलियन बीलियन डालर का कारोबार होता है | लगभग 10 दिनों का अवकास होता है | परिवार के सदस्य जो अलग अलग जगह पर रहते है अपने घर पर आ जाते है  जिस  तरह हमारे यहाँ  दिवाली पर सभी स्वजन एकत्रित होते हैं  | जिस  प्रकार हम दिवाली पर पूजन  उपासना करते हैं उसी तरह ईसाई समास के लोग  चर्च और गिरजाघर में उपासना प्राथना करते हैं |
  ईसाई धर्म का मानना है कि प्रभु यीशु यानी जीसस क्राइस्ट का जन्म बैथलहम में मैरी और जोसेफ के घर हुआ था. सेक्सटस जूलियस अफ्रीकानस ने 221 ई. में पहली बार 25 दिसंबर को जीसस क्राइस्ट का जन्म दिवस मनाने का फैसला लिया था. तब से अभी तक 25 दिसंबर को देश-दुनिया में क्रिसमस डे के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है.
जानिये उस कथा  को कि  25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस?
यह त्योहार हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था। जीसस क्राइस्ट एक महान व्यक्ति थे और उन्होंने समाज को प्यार और   सच्ची  इंसानियत की शिक्षा  दी थी  |
मान्यता है कि 25 दिसम्बर को ही   यीशु  का जन्म हुआ था |
विश्व के अलग  अलग  देशों के अंदर  निम्न प्रमुख घटनाए होती है |
क्रिसमस ट्री : सदाबहार क्रिसमस वृक्ष डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है जिस पर सजावट की जाती है। क्रिसमस ट्री को रिबन, गिफ्ट, घंटी और लाइट्स लगाकर सजाया जाता है। यह क्रिसमस की परंपरा का अहम हिस्सा है।
मान्यता अनुसार   क्रिसमस के दिन  सांता क्लॉज   के दिन स्वर्ग से आकर बच्चों के लिए टॉफियां, चॉकलेट, फल, खिलौने व अन्य उपहार बांटकर वापस स्वर्ग में चले जाते हैं। सांता क्लॉस चौथी शताब्दी में मायरा के निकट एक शहर में जन्मे थे। उनका नाम निकोलस था। अब लोग उन्हीं के भेष में बच्चों को गिफ्ट देते हैं।
 संत निकोलस के काल में बच्चे मौजे लटका देते थे ताकि सैंटा उसमें टॉफियां या तोहफे रख सके। हलांकि आज भी कई जगहों पर यह किया जाता है ताकि सैंटा क्लॉज़ आ सकें और उनमें अपने उपहार डाल सकें।
 गिरजाघरों में पारंपरिक तरीके से ईसा मसीह के लिए गाए जा रहे भक्ति गीत के अलावा ‘जिंगल बेल्स   ‘ओह होली नाइट’ और ‘सैंटा क्लॉस इज कमिंग टु टाउन’ सरीखे गानों से भी माहौल खुशनुमा हो जाता है। यह भी क्रिसमस परंपरा का खास हिस्सा है।
 क्रिसमस के दिन घंटी को बजाने का भी रिवाज है जिसे रिंगिंग बेल  कहते
हैं। यह बेल सदियों में सूर्य के लिए भी बजाई जाती है और खुशियों के लिए भी। मान्यता है कि घर को घंटियों से सजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
क्रिसमस के दौरान घर और चर्च में ईसा के जन्म की झांकियां बनाई जाती है जिसमें भेड़, गोशाला या घोड़ों के अस्तबल में बालक येशु को मदर मैरी के साथ दर्शाया जाता है। किसी बर्फ के क्षेत्र में सांता क्लॉज को उनके हिरणों के साथ दिखाया जाता है। इसी तरह की झांकियां होती हैं।
 इस दिन हरेक घरों के अंदर  स्वादिष्ट पकवान और पुडिंग यथा कई पश्चिम देशों में स्‍मोक्‍ड टर्की, फ्रुअ केक, विगिल्‍ला, जेली पुडिंग, टुररॉन आदि को बनाना पसंद किया जाता है। भारत में भी कई तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। क्रिसमस पर हर देश में अलग परम्परागत भोजन भी बनता है। कुछ लोग दूध और कुकीज के रुप में सैंटा के लिये भोजन रखते हैं। ईसा मसीह के जन्मदिन पर खुशियां बांटने के लिए केक भी खाया जाता है और लोगों को बांटा जाता है। क्रिसमय पुडिंग बनाने की परंपरा 1970 में प्रारंभ हुई। यह आलूबुखारे से दलिया जैसा व्यंजन बनाया जाता है। बाद में मांस, शराब और रोटी मिलाकर पुडिंग बनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।
 एक्समस के दिन  जगह  जगह पर प्राथना की जाती है  और मोमबत्तियां  जलाई  जाती है | इस दिन चर्च में विशेष तौर पर सामूहिक प्रार्थना भी की जाती है। इस दिन लोग चर्च जाते हैं और क्रिसमस कैरोल (धार्मिक गीत) गाते हैं। क्रिसमय पर गिरजाघरों यानी चर्च में जाकर लोग ईसा मसीह और मदर मैरी की मूर्ति के समक्ष मोमबत्तियां जलाकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं। मान्यता है कि अलग-अलग रंगों की मोमबत्तियां जलाने से जीवन में खुशियां और सफलता आती हैं।
 परंपरा से अब सिर्फ सांता ही उपहार नहीं देते हैं बल्कि क्रिसमस पर लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं। कई लोग सैंटा का भेष धारण करके बच्चों को टॉफियां, चॉकलेट, फल, खिलौने व अन्य उपहार बांटते हैं। गिफ्ट के साथ ही क्रिसमस कार्ड भी दिए जाते हैं। कहते हैं कि सर्वप्रथम क्रिसमस कार्ड विलियम इंगले द्वारा सन् 1842 में अपने दोस्तों को भेजा था। बाद में यह कार्ड महारानी विक्टोरिया को दिखाया गया। इससे खुश होकर उन्होंने अपने चित्रकार डोबसन को बुलाकर शाही क्रिसमस कार्ड बनवाने के लिए कहा और तब से क्रिसमस कार्ड की शुरुआत हो गई।
क्रिसमस की 10 दिन की छुट्टियों के दौरान लोग या तो अपने पैत्रक घर, नाना नानी या दादा दादी के घर जाकर क्रिसमय मनाते हैं। कुछ लोग समुद्र के तट पर जाकर क्रिसमस का आनंद लेते हैं। इस दिन नए वस्त्रों में इस दिन लाल और हरे रंग का अत्यधिक उपयोग होता है क्योंकि लाल रंग जामुन का होता है और यह ईसा मसीह के खून का प्रतीक भी
 है।
आईये हम सभी अपने परिजनों और ईष्ट मित्रों के साथ बड़े दिन यानि 25 दिसम्बर को उल्लस और हर्ष के साथ मनाये |
डा जे के गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कॉलेज शिक्षा जयपुर
पिछला नेता प्रतिपक्ष डा. द्रोपदी कोली के अथक प्रयास से वार्ड 49 व वार्ड 43 में एस्कैप चैनल का किया उद्घाटन अगला धरने-प्रदर्शनों में खाये धक्के

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