देश में GST लागू होने के समय से ही दुग्ध उत्पादकों एवं उनके जनप्रतिनिधियों ने इसका विरोध किया था और लगातार विरोध करते रहे हैं। कारण स्पष्ट है – GST लागू होने से अतिरिक्त कर भार का लाभ केवल भारत सरकार एवं राज्य सरकार को हुआ, जबकि इसका सीधा नुकसान दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा।
पशुपालकों पर असर – कर भार के चलते दुग्ध उत्पादकों को अपने दूध का क्रय मूल्य कम मिला।
उपभोक्ताओं पर असर – आम जनता को ऊँचे दाम पर दूध एवं दुग्ध उत्पाद खरीदने पड़े और महँगाई की मार झेलनी पड़ी।
अजमेर डेयरी पर सीधा असर :-
GST के कारण अजमेर डेयरी को नये प्लांट के निर्माण में 50 से 60 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च भारत सरकार को भुगतान करना पड़ा।
यदि यह कर न लगता तो आज तक अधूरा पड़ा चीज़ प्लांट, अक्षय ऊर्जा प्लांट और जर्मनी की कम्पनी से हासिया चिपलेट मशीन खरीद कर स्थापित हो चुकी होती।
धनाभाव के कारण उपरोक्त सभी कार्य रुक गये।
अजमेर सरस डेयरी को प्रतिवर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये का GST दूध एवं दुग्ध उत्पादों के विपणन पर देना पड़ रहा है। विगत 5 वर्षों में लगभग 80-90 करोड़ रुपये केवल GST में खर्च हो गये।
स्पष्ट निष्कर्ष :- इन परिस्थितियों से यह प्रमाणित हुआ है कि भारत सरकार ने अब देर से सही, लेकिन “देर आए दुरुस्त आए” कहावत को चरितार्थ किया है।
मेरा निवेदन :- देश का गरीब आदमी रोटी के साथ दही-छाछ का उपयोग करता है। अतः हम भारत सरकार से दृढ़ आग्रह करते हैं कि दही एवं छाछ पर लगे 5% GST को तत्काल समाप्त किया जाए।
यदि दही-छाछ पर से भी GST हटाया जाता है तो –
दुग्ध उत्पादकों को राहत मिलेगी,
उपभोक्ताओं को महँगाई से राहत मिलेगी,
अन्तिम टिप्पणी :- यह सच है कि भारत सरकार ने घटती लोकप्रियता ग्राफ के दबाव में आकर अब GST कम किया है। इस GST को अब कम करने से विश्व व्यापार में भारत का दूध एवं दुग्ध उत्पाद छा जायेंगे। इससे दुग्ध उत्पादकों को राहत मिलेगी और उपभोक्ताओं को महँगाई से निजात मिलेगी।