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शायद इसलिए हंगामा है बरपा (व्यंग्य)

गेस्ट राइटर
/
April 10, 2023

सुनील कुमार महला
अकबर इलाहाबादी जी ने बरसों पहले एक गज़ल लिखी थी ‘हंगामा है क्यों बरपा…’, जिसे गुलाम अली जी ने गाया था। इस ‘हंगामा..’ ग़ज़ल ने उस समय देश ही नहीं अपितु विदेशों तक में भी तहलका मचा दिया था और आज भी यह ग़ज़ल अमूमन हर किसी के द्वारा सुनी जाती है और इस पर खूब वाह वाह की जाती है। हर जगह हंगामे का ही खेल है। हंगामें से ही मेल है।
अजी ! हंगामे का गणित ही कुछ ऐसा है। यह सारा संसार ही आज हंगामामय है। बस इसी में छिपा कहीं न कहीं कोई भय है। जीवन में अगर हंगामा न हो तो जीवन नीरस-नीरस सा लगता है, इसलिए हंगामा आज के जीवन का बहुत जरूरी एलीमेंट है। हंगामा बना आज एलिफेंट है। जीवन का जैसे जोरदार ये(हंगामा) सप्लीमेंट है। हंगामा जीवन सेंट(सुंगध) है। हाल
ही में संसद के बजट सत्र का अंतिम दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया और लोकसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई। बजट सत्र का हो गया कबाड़ा। हंगामे ने सारा खेल बिगाड़ा। हंगामा मचाने में एनर्जी तो लगती है लेकिन शायद हंगामा करने वालों के दिल और आत्मा को इससे कोई तगड़ा सुकून मिलता होगा। कोई सत्ता वापसी के लिए हंगामा मचाते हैं तो कोई सत्ता से बाहर होने पर हंगामा मचाते हैं। कभी ‘रिश्तों’ में हंगामा मचता है तो कभी ‘किश्तों’ में हंगामा मचता है। कोई ‘कैरियर’ को लेकर तो कोई ‘एरियर’ को लेकर हंगामा मचाते हैं। कोई ‘खेल’ के लिए तो कोई ‘सेल’ के लिए हंगामा मचाते हैं। स्कूल की छुट्टी होती है तो छात्र हंगामा मचाते हुए स्कूल से बाहर निकलते हैं। इधर कुछ समय से एक स्टेट में राइट टू हेल्थ को लेकर डॉक्टर्स और सरकार ने हंगामा किया। हंगामे में सरकार भी जीती और डाक्टर्स भी जीते। सुनकर अच्छा लग रहा है कि आजकल दोनों ही खुश हैं। वैसे, आजकल सुना तो ये भी है कोरोना के केस फिर बढ़ने लगे हैं, कोरोना हंगामे पर उतारू है। आज मरीज इलाज के लिए तो डाक्टर अपनी फीस के लिए हंगामा मचाते हैं। कोरोना को लेकर सरकारें हंगामा मचा रही हैं, लोगों को सतर्क कर रही हैं। अजी ! आदमी कभी बेरोजगारी के लिए तो कभी शिक्षा के लिए, कभी गरीबी के लिए तो कभी महंगाई के लिए हंगामा मचाता है। अभी आप देखिए इन दिनों ‘गोल्ड’ भारत ही नहीं इंटरनेशनल मार्केट तक में हंगामा मचा रहा है और सुना है कि इंडिया में तो यह इकसठ हजारी हो गया है। कभी ‘खेल’ में हंगामा मचता है तो कभी ‘तेल’ में तो कभी ‘जेल’ में। सुना है कि ‘तेल-वेल’ भी जल्द ही हंगामा मचाने वाले हैं। अजी ! अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल उछाल जो मारने लगा है। वो हाल ही की बात है हमारे खासमखास तोताराम जी के मोहल्ले में पिछले कुछ दिनों से जलदाय विभाग से घर के नलों में पानी नहीं आ रहा, तो मोहल्ले वालों ने पानी के लिए हंगामा मचा दिया। रामलुभाया जी के मोहल्ले में दो-तीन बंदर पिछले दिनों से हंगामा मचा रहे हैं और कुछ लोगों व बच्चों को काट खाया , तो मोहल्ला वासियों ने नरक निगम के कर्मचारियों के कामकाज न करने को लेकर हंगामा मचा दिया। चुनावी समय से नेताजी और पार्टी कार्यकर्ता हंगामा मचाते हैं तो कभी स्टूडेंट्स अपनी मांगों को मंगवाने के लिए हंगामा मचाते हैं। कभी चमचे हंगामा मचाते हैं तो कभी चमचों को पालने वाले मालिक।
कोई रेल और बस टिकट के लिए तो कोई चुनावी टिकट के लिए हंगामा मचाता है। कोई ‘रिजर्वेशन’ के लिए ‘कंजर्वेशन’ के लिए हंगामा मचाता है। वैसे हंगामे से इतर कोई भी क्षेत्र आज बचा नहीं है। बच्चों को मोबाइल में गेम खेलने नहीं दें तो बच्चे हंगामा मचाते हैं। वैसे किसी बड़े स्टार की बड़ी फिल्म बहुत दिनों बाद आती है तो भी हंगामा मचता है। वो क्या है कि हमें तोताराम जी ने यह ज्ञान दिया है कि हंगामे में आदमी को भीषण घोर सुपर परम् आनंद की अनुभूति होती है। कभी किसी रिपोर्ट पर हंगामा मचता है तो कभी किसी राजनेता के बड़बोलों पर हंगामा मचता है। कभी पुलिस हंगामा मचाती है तो कभी चोर हंगामा मचाते हैं। कोई भ्रष्टाचार के लिए हंगामा मचाते हैं तो कोई ईमानदारी को लेकर हंगामा मचाते हैं। कोई अपने अधिकारों को लेकर हंगामा मचाते हैं तो कोई इंसाफ और न्याय के लिए हंगामा मचाते हैं। कभी मौसम हंगामा मचाता है तो कभी किसान हंगामा मचाते हैं। कभी ‘प्रकृति’ हंगामा मचाती है तो कभी कोई ‘विकृति’ हंगामा मचाती है।
दरअसल, हंगामा सर्वत्र विद्यमान है, जित देखो,तित हंगामा देखने सुनने को मिल जाएगा। और तो और अजी ! अपने अमरीका के ट्रंप जी को ही देख लिजिए, आजकल उनको लेकर भी पूरे वर्ल्ड में खूब हंगामा मचा हुआ है। हंगामे की वस्तुस्थिति को देखते हुए हम भी यह सोच रहे हैं कि हम भी लेखन के क्षेत्र में हंगामा मचा दें और हमारा नाम ‘सुनील कुमार महला’ उर्फ ‘हंगामा सिंह’ रख लें। गुस्ताखी माफ ! जय राम जी की।

(आर्टिकल का उद्देश्य पाठकों का मनोरंजन करने मात्र तक सीमित है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना इस आर्टिकल का उद्देश्य नहीं है।)
सुनील कुमार महला,
स्वतंत्र लेखक व युवा साहित्यकार
पटियाला, पंजाब
ई मेल mahalasunil@yahoo.com

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